Philosophie des Geldes
- भाषा:
- जर्मन
- स्थिति:
- संपूर्ण कृति
- लेखकत्व:
- लेखक द्वारा लिखित
- पाठ की स्थिति:
- स्कैन की कोई गड़बड़ी नहीं मिली (पूरे पाठ पर स्वचालित माप, हाथ से जाँचा नहीं गया)
- विस्तार:
- ~3,60,000 शब्द · 1,726 अंश
इस कृति का हवाला दें
- APAगेओर्ग ज़िमेल. (n.d.). Philosophie des Geldes. Digital reproduction: SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/georg-simmel/philosophie-des-geldes
- MLAगेओर्ग ज़िमेल. Philosophie des Geldes. Digital reproduction, SigPhi, https://sigphiai.com/hi/works/georg-simmel/philosophie-des-geldes.
- Chicagoगेओर्ग ज़िमेल. Philosophie des Geldes. Digital reproduction, SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/georg-simmel/philosophie-des-geldes.
यह उस संस्करण का संदर्भ है जिसे SigPhi पुनः प्रस्तुत करता है: SigPhi उसकी डिजिटल प्रति है, प्रकाशक नहीं। संस्करण का वर्ष मेटाडेटा में नहीं है (इसलिए «n.d.»), और अनुवादक तभी दिखाया जाता है जब वह दर्ज हो।
यह किस बारे में है
धन को अर्थशास्त्र का विषय मानकर नहीं, एक रूप मानकर देखा गया है: वह जो गुणों को मात्राओं में बदल देता है और ऐसा करते हुए मनुष्यों के आपसी संबंध नए सिरे से गढ़ता है।
संदर्भ और इतिहास
1900 में प्रकाशित। ज़िमेल दोनों पक्ष एक साथ थामे रहते हैं: धन मुक्त करता है — स्वामी, श्रेणी और गाँव पर की व्यक्तिगत निर्भरता काट देता है — और साथ ही सब कुछ समतल कर देता है, क्योंकि जो तुलनीय नहीं था उसे तुलनीय बना देता है। यह उन ग्रंथों में है जहाँ समाजशास्त्र संस्थाओं का वर्णन छोड़कर आधुनिक जीवन को देखने लगता है; लुकाच और बेन्यामिन यहीं से निकले।
यह संपादकीय संदर्भ है, उद्धरण-योग्य स्रोत नहीं: कृति के अंशों के विपरीत, इन कथनों की जाँच कॉर्पस में नहीं की जा सकती।
Wesen nicht die Einheit, sondern der Unter¬ schied ist: die Rangierung nach Werten. Daß Gegenstände, Ge¬ danken, Geschehnisse wertvoll sind, das ist aus ihrem bloß natür¬ lichen Dasein und Inhalt niemals abzulesen; und ihre Ordnung, den Werten gemäß vollzogen, weicht von der natürlichen aufs weiteste ab. Unzählige Male vernichtet die Natur das, was vom Gesichtspunkt seines Wertes aus eine längste Dauer fordern könnte, und konserviert das Wertloseste, ja dasjenige, was dem Wertvollen den Existenzraum benimmt. Damit ist nicht etwa eine prinzipielle Gegnerschaft und durchgängiges Sich-Ausschließen beider Reihen gemeint; denn dies würde immerhin eine Beziehung der einen zur anderen bedeuten, und zwar eine teuflische Welt ergeben, aber eine vom Gesichtspunkte de Wertes, wenn auch mit umgekehrtem Vorzeichen, bestimmte Viel¬ mehr, das Verhältnis zwischen beiden ist absolute Zufälligkeit. M derselben Gleichgültigkeit, mit der uns die Natur die Gegenstar ide unserer Wertschätzungen einmal darbietet, versagt sie sie uns anderes Mal; so daß gerade die gelegentliche Harmonie beider Reihen, die Realisierung der aus der Wertreihe stammenden Forde¬ rungen durch die Wirklichkeitsreihe, die ganze Prinziplosigkeit ihres Verhältnisses nicht minder offenbart als der entgegengesetzte Fa .