Krishna Mishra
भारतीय नाटककार और संस्कृत कवि (ईसा की 11वीं शताब्दी), चंदेल राजा कीर्तिवर्मन के दरबार में। 'प्रबोधचंद्रोदय' के रचयिता — छह अंकों का एक रूपकात्मक नाटक, जिसमें विवेक, मोह, श्रद्धा आदि अमूर्त भाव पात्र बनकर आते हैं और जिसमें वेदांत की प्रतिद्वंद्वी मतों पर विजय दिखाई गई है।
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