Metaphysische Anfangsgründe der Naturwissenschaft
- भाषा:
- जर्मन
- स्थिति:
- संपूर्ण कृति
- लेखकत्व:
- लेखक द्वारा लिखित
- पाठ की स्थिति:
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- विस्तार:
- ~1,50,000 शब्द · 724 अंश
इस कृति का हवाला दें
- APAइमैनुएल कांट. (n.d.). Metaphysische Anfangsgründe der Naturwissenschaft. Digital reproduction: SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/immanuel-kant/metaphysische-anfangsgrunde-der-naturwissenschaft
- MLAइमैनुएल कांट. Metaphysische Anfangsgründe der Naturwissenschaft. Digital reproduction, SigPhi, https://sigphiai.com/hi/works/immanuel-kant/metaphysische-anfangsgrunde-der-naturwissenschaft.
- Chicagoइमैनुएल कांट. Metaphysische Anfangsgründe der Naturwissenschaft. Digital reproduction, SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/immanuel-kant/metaphysische-anfangsgrunde-der-naturwissenschaft.
पुनरुत्पादित संस्करण का संदर्भ। SigPhi डिजिटल पुनरुत्पादन है। ज्ञात होने पर वर्ष, प्रकाशक और अनुवादक दिए जाते हैं; «n.d.» का अर्थ अज्ञात वर्ष है।
यह किस बारे में है
1786 की वह पुस्तक जिसमें कांट अपने समीक्षात्मक दर्शन को भौतिकी पर लागू करते हैं: प्रकृति-विज्ञान को कुछ भी मापने से पहले क्या मान लेना पड़ता है।
संदर्भ और इतिहास
यह 'शुद्ध विवेक की समीक्षा' के दो संस्करणों के बीच निकली और उसी पर टिकी है। प्रतिज्ञा यह है कि भौतिकी अपने आधार अनुभव से नहीं पा सकती: द्रव्यमान, बल या संवेग जैसे संप्रत्यय देखे नहीं जाते, मान लिए जाते हैं। कांट पदार्थ को दो विपरीत बलों — आकर्षक और विकर्षक — से गढ़ते हैं, और उन्हीं से अभेद्यता तथा घनत्व निकालते हैं; यह शून्य में कठोर परमाणुओं वाली धारणा के विरुद्ध है। पुस्तक कोटि-तालिका के अनुसार चार भागों में व्यवस्थित है। यह कांट का सर्वाधिक तकनीकी पाठ है और उनकी बड़ी कृतियों में सबसे कम पढ़ा गया; और यही वह है जिसने बाद की जर्मन भौतिकी को सबसे सीधे प्रभावित किया — 'क्षेत्र' की धारणा सहित।
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Der Begriff der Materie musste daher durch alle vier genannten Functionen der Verstandesbegriffe (in vier Hauptstücken) durchgeführt werden, in deren jedem eine neue Bestimmung desselben hinzukam. Die Grundbestimmung eines Etwas, das ein Gegenstand äusserer Sinne sein soll, musste Bewegung sein; denn dadurch allein können diese Sinne afficirt werden. Auf diese führt auch der Verstand alle übrigen Prädicate der Materie, die zu ihrer Natur gehören, zurück, und so ist die Naturwissenschaft durchgängig eine entweder reine oder angewandte Bewegungslehre. Die metaphysischen Anfangsgründe der Naturwissenschaft sind also unter vier Hauptstücke zu bringen, deren erstes die Bewegung als ein reines Quantum, nach seiner Zusammensetzung, ohne alle Qualität des Beweglichen betrachtet und Phoronomie genannt werden kann, das zweite sie als zur Qualität der Materie gehörig, unter dem Namen einer ursprünglich bewegenden Kraft, in Erwägung zieht und daher Dynamik heisst, das dritte die Materie mit dieser Qualität durch ihre eigene Bewegung gegen einander in Relation betrachtet und unter dem Namen Mechanik vorkommt, dass vierte aber ihre Bewegung oder Ruhe blos in Beziehung auf die Vorstellungsart oder Modalität, mithin als Erscheinung äusserer Sinne bestimmt und Phänomenologie genannt wird. Aber ausser jener inneren Notwendigkeit, die metaphysischen Anfangsgründe der Körperlehre nicht allein von der Physik, welche empirische Principien braucht, sondern selbst von den rationalen