Einleitung in die Geisteswissenschaften
- भाषा:
- जर्मन
- स्थिति:
- संपूर्ण कृति
- लेखकत्व:
- लेखक द्वारा लिखित
- पाठ की स्थिति:
- स्कैन की कोई गड़बड़ी नहीं मिली (पूरे पाठ पर स्वचालित माप, हाथ से जाँचा नहीं गया)
- विस्तार:
- ~2,50,000 शब्द · 1,189 अंश
इस कृति का हवाला दें
- APAविल्हेम डिल्थाय. (n.d.). Einleitung in die Geisteswissenschaften. Digital reproduction: SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/wilhelm-dilthey/einleitung-in-die-geisteswissenschaften
- MLAविल्हेम डिल्थाय. Einleitung in die Geisteswissenschaften. Digital reproduction, SigPhi, https://sigphiai.com/hi/works/wilhelm-dilthey/einleitung-in-die-geisteswissenschaften.
- Chicagoविल्हेम डिल्थाय. Einleitung in die Geisteswissenschaften. Digital reproduction, SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/wilhelm-dilthey/einleitung-in-die-geisteswissenschaften.
यह उस संस्करण का संदर्भ है जिसे SigPhi पुनः प्रस्तुत करता है: SigPhi उसकी डिजिटल प्रति है, प्रकाशक नहीं। संस्करण का वर्ष मेटाडेटा में नहीं है (इसलिए «n.d.»), और अनुवादक तभी दिखाया जाता है जब वह दर्ज हो।
यह किस बारे में है
दिल्थाई का यह प्रयत्न कि आत्म-विज्ञानों — इतिहास, विधि, साहित्य, धर्म — को उनकी अपनी पद्धति पर आधारित किया जाए, प्राकृतिक विज्ञानों की पद्धति की नक़ल किए बिना।
संदर्भ और इतिहास
1883 में प्रकाशित। इससे निकला वह भेद ही टिकाऊ सिद्ध हुआ: प्राकृतिक विज्ञान 'स्पष्टीकरण' करते हैं, आत्म-विज्ञान 'समझते' हैं; एक कारण खोजता है और दूसरा अर्थ, और इन दोनों का घालमेल ही वह था जिसे दिल्थाई रोकना चाहते थे। एक बात जान लेनी चाहिए: यह खंड उस कृति का पहला है जिसके और खंड होने थे, और दूसरा कभी नहीं आया। अतः जो पढ़ा जाता है वह समस्या का प्रतिपादन है, उस निर्माण के बिना जो उसके पीछे आना था।
यह संपादकीय संदर्भ है, उद्धरण-योग्य स्रोत नहीं: कृति के अंशों के विपरीत, इन कथनों की जाँच कॉर्पस में नहीं की जा सकती।
und Sprache ein Zeichen diefer Lage. Und in folcher Unficherheit über die Grundlagen der Geifteswifienfchaften zogen fich bie Einzelforicher bald auf bloße Defkription zurück, bald fanden fie in fubjeltiver geiftreicher Auffaffung Genüge, bald warfen fie fich wieder einer Metapbyfil in die Arme, welche dem Vertrauensvollen Sätze veripricht, die das praktiſche Leben umzugeftalten die Kraft haben. Aus dem Gefühl dieſes Zuftandes der Geiſteswiſſenſchaften ift mir der Verſuch entftanden, dad Prinzip der hiſtoriſchen Schule und bie Arbeit der durch fie gegenwärtig durchgehends beftimmten Einzelwiſſenſchaften der Geſellſchaft philoſophiſch zu begründen und jo den Streit zwilchen dieſer Hiftorifchen Schule und den ab⸗ ftralten Theorien zu jchlichten. Mich quälten bei meinen Arbeiten Fragen, die wol jeder nachdenkliche Hiftoriker, Juriſt oder Poli⸗ Xxvi Vorrede.