सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र
- भाषा:
- अंग्रेज़ी
- अनुवाद:
- Hendrik Kern
- स्थिति:
- संपूर्ण कृति
- लेखकत्व:
- अनाम या संकलित
- पाठ की स्थिति:
- स्कैन की कोई गड़बड़ी नहीं मिली (पूरे पाठ पर स्वचालित माप, हाथ से जाँचा नहीं गया)
- विस्तार:
- ~1,40,000 शब्द · 648 अंश
इस कृति का हवाला दें
- APAसद्धर्मपुण्डरीक सूत्र. (n.d.). The Saddharma-Pundarika (Lotus of the True Law, SBE XXI) [सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र] (Hendrik Kern, Trans.). Digital reproduction: SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/lotus-sutra/the-saddharma-pundarika-lotus-of-the-true-law-sbe-xxi
- MLAसद्धर्मपुण्डरीक सूत्र. The Saddharma-Pundarika (Lotus of the True Law, SBE XXI) [सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र]. Translated by Hendrik Kern. Digital reproduction, SigPhi, https://sigphiai.com/hi/works/lotus-sutra/the-saddharma-pundarika-lotus-of-the-true-law-sbe-xxi.
- Chicagoसद्धर्मपुण्डरीक सूत्र. The Saddharma-Pundarika (Lotus of the True Law, SBE XXI) [सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र]. Translated by Hendrik Kern. Digital reproduction, SigPhi. https://sigphiai.com/hi/works/lotus-sutra/the-saddharma-pundarika-lotus-of-the-true-law-sbe-xxi.
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यह किस बारे में है
'सद्धर्मपुंडरीक', पूर्वी एशिया में महायान बौद्ध धर्म का सर्वाधिक प्रभावशाली ग्रंथ; यहाँ 'सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट' के लिए कर्न का अनुवाद।
संदर्भ और इतिहास
संस्कृत में इसकी रचना संभवतः पहली से तीसरी शताब्दी के बीच हुई, पर प्रसिद्धि सबसे अधिक कुमारजीव के 406 के चीनी अनुवाद से मिली — इतिहास उसी ने बनाया। जिस प्रतिज्ञा ने इसे निर्णायक बनाया वह है 'एकयान': बुद्ध के भिन्न-भिन्न उपदेश परस्पर विरोधी सिद्धांत नहीं, बल्कि सुनने वाले की क्षमता के अनुरूप गढ़े गए उपाय हैं, और सभी एक ही स्थान पर ले जाते हैं। यहीं से 'उपायकौशल्य' की धारणा आती है, और वे प्रसिद्ध दृष्टांत — जलता हुआ घर, खोया हुआ पुत्र — जिनके सहारे सूत्र यह समझाता है। इसी ग्रंथ पर चीन में तिआनताई और जापान में तेंदाई तथा निचिरेन संप्रदाय खड़े हुए। कर्न का अनुवाद 1884 का है और संस्कृत से है, चीनी से नहीं: वह उस परंपरा से भिन्न परंपरा पढ़ता है जिसने पूर्वी एशिया को गढ़ा।
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1 It is sufficiently clear, I think, that the Buddha-fields are the heavens, and that we have in the text a description of the aspect of heaven when the stars are twinkling at dawn, shortly after or before.…